समर्थ कश्यप= भागलपुर पुलिस जिला नवगछिया रंगरा प्रखंड के भवानीपुर स्थित आस्था के केंद्र भदय बाबा स्थान को रविवार को गहरा आघात पहुंचा, जब वर्षों से सेवा कर रहे प्रमुख सेवक एवं पुजारी पारो महंत का दोपहर में निधन हो गया। उनके ब्रह्मलीन होने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में शोक और श्रद्धा का माहौल बन गया। देर संध्या मंदिर परिसर में ही वैदिक परंपराओं के अनुसार उनकी समाधि बनाई गई, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और ग्रामीण उपस्थित रहे।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार भदय बाबा स्थान का इतिहास चमत्कारों से जुड़ा है। कहा जाता है कि एक समय जब क्षेत्र में हैजा जैसी घातक बीमारी से लोगों की मौतें हो रही थीं, तब भदय बाबा की साधना, पूजा-अर्चना और कीर्तन से महामारी पर रोक लगी थी। तभी से यह स्थान ग्रामीणों के लिए आस्था, विश्वास और संरक्षण का प्रतीक बना हुआ है।
पारो महंत दशकों तक भदय बाबा स्थान की सेवा में समर्पित रहे। वे न केवल पुजारी थे, बल्कि ग्रामीणों के लिए मार्गदर्शक और आध्यात्मिक आधार भी थे। पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से उन्होंने पीढ़ियों तक आस्था की परंपरा को जीवित रखा।
उनकी समाधि निर्माण के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्ति और शोक का अद्भुत संगम देखने को मिला। हर ओर “भदय बाबा की जय” के जयघोष और नम आंखों से श्रद्धालुओं ने अपने प्रिय सेवक को अंतिम विदाई दी। ग्रामीणों का कहना है कि पारो महंत का योगदान और भदय बाबा स्थान की महिमा आने वाली पीढ़ियों तक अमर रहेगी।
भदय बाबा स्थान के सेवक पारो महंत ब्रह्मलीन


