समर्थ कश्यप= नवगछिया के इस्माईलपुर थाना क्षेत्र के पूर्वी भिट्ठा गांव में बुधवार की सुबह ऐसी थी, जिसे गांव शायद ही कभी भूल पाए। बीती रात बस और ऑटो की भीषण टक्कर में पुरनी देवी और उनके पति सुनील दास की दर्दनाक मौत हो गई। रात में आई इस खबर ने पूरे गांव को सन्न कर दिया।
सुबह होते-होते उनके घर के बाहर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। आंगन में एक साथ रखे दोनों शवों को देखकर हर आंख नम थी। रिश्तेदार, पड़ोसी और परिचित—सबके चेहरे पर अविश्वास और गहरा दुख साफ झलक रहा था।
मासूम की पुकार से कांप उठा माहौल
दंपती के चार पुत्र—ब्रजेश, छंगुरी, रोहित और छोटू—हैं। इनमें रोहित और छोटू अभी नाबालिग हैं। सबसे छोटा बेटा छोटू, जो सातवीं कक्षा में पढ़ता है, बार-बार अपनी मां के शव को हिलाकर कह रहा था, “मां उठो ना…”। उसे यह समझ नहीं आ रहा था कि उसके माता-पिता अब कभी नहीं लौटेंगे। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं।
तीसरा बेटा रोहित बेंगलुरु में मजदूरी करता है। जैसे ही उसे हादसे की सूचना मिली, वह तुरंत घर के लिए रवाना हो गया।
शोक में थम गया गांव
दंपती की एक साथ निकली अर्थी ने पूरे गांव को झकझोर दिया। जब अंतिम यात्रा शुरू हुई तो सैकड़ों ग्रामीण साथ हो लिए। सिसकियों और रोने की आवाजों के बीच दोनों की अर्थियां श्मशान घाट तक पहुंचीं।
गांव में शोक इतना गहरा था कि कई घरों में चूल्हा तक नहीं जला। हर गली में बस यही चर्चा थी—“भगवान ऐसी विपत्ति किसी को न दे।”
नम आंखों से दी अंतिम विदाई
बड़े बेटे ब्रजेश ने अपने पिता को मुखाग्नि दी, जबकि छोटे बेटे ने मां को अंतिम विदाई दी। एक ही परिवार से एक साथ दो जनाजे उठना पूरे इलाके के लिए असहनीय पीड़ा का क्षण बन गया।
यह हादसा केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं। पूर्वी भिट्ठा गांव आज भी उसी सदमे में डूबा है।
हृदयविदारक हादसा: एक साथ उठीं पति-पत्नी की अर्थियां, सिसकियों में डूबा पूर्वी भिट्ठा


