गोपालपुर के सीओ पर कानूनी शिकंजा, डेढ़ माह में दो नालसीवाद से राजस्व महकमे में हड़कंप

गोपालपुर अंचल के अंचलाधिकारी रोशन कुमार के खिलाफ डेढ़ माह के भीतर दो अलग-अलग नालसीवाद दायर होने से प्रशासनिक महकमे में तीखी हलचल मच गई है। मामला नवगछिया व्यवहार न्यायालय में विचाराधीन है, जहां न्यायालय ने दोनों परिवादों पर संज्ञान लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। लगातार सामने आ रहे आरोपों ने राजस्व तंत्र की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहला मामला: पुश्तैनी जमीन पर कथित हेरफेर
गोपालपुर डिमाहा निवासी ललन कुमार चौधरी ने आरोप लगाया है कि उनकी पुश्तैनी भूमि से जुड़ा भू-हदबंदी वाद (संख्या 339 से 343/76) वर्ष 2011 में निष्पादित हो चुका था तथा 20 जून 2012 को इसकी अधिसूचना जिला गजट में प्रकाशित भी हुई थी। इसके बावजूद कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दोबारा दाखिल-खारिज की प्रक्रिया चलाई गई। परिवादी का दावा है कि सरकारी अभिलेखों में छेड़छाड़ कर दूसरे पक्ष को लाभ पहुंचाने की मंशा से आदेश पारित किया गया।
दूसरा मामला: करोड़ों की जमीन के म्यूटेशन पर सवाल
दूसरा नालसीवाद सिंधिया मकंदपुर निवासी कुमारी ममता सिंह की ओर से दायर किया गया है। आरोप है कि करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि का नामांतरण कथित मिलीभगत के तहत गलत तरीके से कर दिया गया। परिवाद में भू-माफिया और कुछ राजस्व अधिकारियों के बीच सांठगांठ की आशंका जताई गई है, जिससे सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सवाल
राज्य सरकार द्वारा राजस्व विभाग में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू होने के बावजूद एक ही अंचलाधिकारी पर अल्प अवधि में दो नालसीवाद दायर होना प्रशासनिक साख के लिए चुनौती माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज है और उच्चाधिकारियों की भूमिका पर भी निगाहें टिकी हैं।
समाचार लिखे जाने तक संबंधित अंचलाधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल दोनों प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन हैं। आगामी सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितना दम है और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी।

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